Menstrual Hygiene Day: अक्षय कुमार की पैडमैन ही नहीं, ये भी हैं महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी फिल्में-डॉक्यूमेंट्री Menstrual Hygiene Day: padman phullu movies and documentaries based on periods

Menstrual Hygiene Day: अक्षय कुमार की पैडमैन ही नहीं, ये भी हैं महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी फिल्में-डॉक्यूमेंट्री Menstrual Hygiene Day: padman phullu movies and documentaries based on periods


फुल्लू की कहानी

ऑस्कर विनिंग स्लमडॉग, फिल्मीस्तान और जब तक है जां के लिए नेशनल विनिंग फिल्मों का हिस्सा रहे शारिब हाशमी फुल्लू फिल्म में लीड रोल में नजर आए। जिन्होंने पैडमैन की भूमिका निभाई। फिल्म में आप देखेंगे कि कैसे वो पैड से जुड़ी जानकारियां फुल्लू जुटाता है, फिर वह इस समस्या को दूर करने के लिए सस्ते सैनेटरी पैड के अपने सपने को पूरा करता है। बेहद रियल तरीके से निर्देशक ने इसे पर्दे पर उतारा है। इस फिल्म में एक जबरदस्त डायलॉग भी था, ”जो औरत का दर्द नहीं समझता भगवान उसे मर्द नहीं समझता, सरकार ने चवन्नी बंद की है लेकिन मैं अठन्नी में दो पैड दूंगा।”

पैडमैन vs फुल्लू

पैडमैन vs फुल्लू

एक फिल्म सुपरहिट तो एक को फिल्म को शायद ही लोग जानते हो। पैडमैन फिल्म ने करीब 150 करोड़ का बिजनेस किया था। वहीं फुल्लू जैसी फिल्म ने मुश्किल से ही कुछ कमाया होगा। लेकिन खास बात ये है कि फुल्लू जैसी छोटे बजट वाली फिल्म ने महिलाओं के मासिक धर्म के विषय को सबसे पहले उठाया और बखूबी दिखाया।

फुल्लू कैसे अलग है पैडमैन से

फुल्लू कैसे अलग है पैडमैन से

फुल्लू और लक्ष्मी (अक्षय कुमार का किरदार) दोनों ही गरीब गांव के परिवार से जुड़े दिखाए गए हैं। लेकिन दोनों फिल्मों में बड़ा अंतर फिल्म का अंत था। पैडमैन में अक्षय कुमार पैडमैन बनकर उभरते हैं जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त होती है लेकिन फुल्लू के साथ ऐसा नहीं था, फुल्लू खुद सफल होता है लेकिन पैडमैन की तरह नहीं बन पाता। पैडमैन में अक्षय कुमार ने न केवल गांव की महिलाओं की जिंदगी बदली बल्कि उन्हें रोजगार भी दिया। कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि फुल्लू संघर्ष ज्यादा करता है लेकिन उतना बड़ा हीरो बनकर नहीं उभर पाता।

पैडमैन को मिले नेशनल अवॉर्ड

पैडमैन को मिले नेशनल अवॉर्ड

अक्षय कुमार की पैडमैन को सोशल इशु को लेकर नेशनल अवॉर्ड मिला था लेकिन फुल्लू ऐसा कोई बड़ा अवॉर्ड नहीं जीत पाई। लेकिन फुल्लू में शारिब हाशमी ने शानदार काम किया था। वह गांव के उस समझदार शख्स का किरदार निभाते नजर आए जो महिलाओं की मासिक धर्म से जुड़ी समाज की गलत धारणाओं को तोड़ते नजर आए। वह महिलाओं के दर्द को समझे और दूसरों को भी समझाया।

असली पैडमैन

असली पैडमैन

बता दें ये दोनों फिल्में माहवारी और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी थी। साथ ही अरुणाचलम मुरुगननाथम की जिंदगी से प्रेरित थी। आज हम उन्हें असली पैडमैन के नाम से जानते हैं। अरुणाचलम तमिलनाडु के कोयंबटूर से हैं जो सेनेटरी नैपकिन बनाने के लिए दुनिया में जाने गए। उन्होंने माहवारी को लेकर सबसे सस्ती मशीन का निर्माण किया। उनका एकमात्र लक्ष्य था कि महिलाएं स्वच्छता के साथ साथ जागरुक हो सभी को सस्ते में सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध करवाई जा सके।

पैडमैन पर सबसे पहले बनी डॉक्यूमेंट्री

पैडमैन पर सबसे पहले बनी डॉक्यूमेंट्री

अरुणाचलम के जीवन पर सबसे पहले बनी Menstrual man है। जिसे अमित विरमानी ने डायरेक्ट किया। साल 2013 में ये डॉक्यूमेंट्री रिलीज हुई जिसमें उनके संघर्ष और उनके यूनिक आइडिया को दिखाया।

माहवारी और स्वच्छता से जुड़ी एक अहम डॉक्यूमेंट्री

माहवारी और स्वच्छता से जुड़ी एक अहम डॉक्यूमेंट्री

मेंसुरेशन या माहवारी के विषय से जुड़ी नेटफ्लिकस की डॉक्यूमेंट्री है पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस। जिसे Rayka Zehtabchi ने डायरेक्ट किया है। इसे ऑस्कर में ‘डॉक्यूमेंटरी शॉर्ट सब्जेक्ट’ में नॉमिनेशन भी मिला था।



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